06-Sep-2009

पटाखे

आज मैं बहुत खुश हूँ। बड़े भैया कल शहर से आए और सुबह उठते ही मुझे बुलाकर कहा...मोहन..आज हम पटाखे लेने चलेंगें...जल्दी से तैयार हो जाओ और रवि को भी तैयार कर लो... दस बजे हम निकल पड़ेंगे।

रवि बड़े भइया का आठ साल का इकलौता बेटा है जो कि हमारे साथ ही रहता है और मुझसे तीन साल छोटा है। भइया और भाभी दोनों शहर में नौकरी करते हैं। भाभी ने रवि के छः महीने का होते ही दुबारा नौकरी ज्वाइन कर ली थी। कहते हैं शहर में अगर मियां-बीवी दोनों काम ना करे तो गुजारा नहीं होता। माँ एक बार भैया के पास रहने गई और जब देखा कि भाभी की नौकरी की वजह से रवि की देखभाल सही ढंग से नही हो पा रही तो उसे यहाँ ले आई। तब से रवि यहीं है और बड़े होने पर उसका यहीं स्कूल में दाखिला भी करवा दिया गया। रवि के आने से मुझे खेलने को एक साथी मिल गया। हमलोग साथ-साथ स्कूल जाते, खेलते और सोते थे। भैया-भाभी छुट्टियों में हमारे पास आ जाते थे, तब तो और भी मज़ा आता था। हालाँकि दिवाली पर बड़े भैया काफी सालों बाद ही आए हैं ।

इस दिवाली पर बड़े भैया को प्रमोशन मिला है, घर में सभी बड़े खुश हैं। और मेरा मन तो बल्लियों ऊछल रहा है, क्योकि इस बार बड़े भैया पटाखे दिलवाने ले जा रहे हैं। बल्लू भैया, जो कि बाबूजी की दुकान सम्हालता है, हमें पटाखों के लिए बड़ा तरसाता है। बाबूजी से तो कभी पैसे मांगने की हिम्मत ही नहीं होती। माँ भी काफी मिन्नतें करने के बाद जितने पैसे देती थी, उससे एक दो-पैकेट ही आते थे और वह भी छोटे वाले। गली के बच्चे तो दिवाली के पन्द्रह दिन पहले से ही पटाखे बजाना शुरू कर देते हैं। मैं और रवि कभी तो उनके पटाखों के बीच ही कूद-कूद कर खुश होते रहते, या फ़िर उदास होकर दूर खड़े देखते रहते। बल्लू भैया बस दिवाली वाले दिन एक थैला भरकर पटाखे लाता, लेकिन मांगने पर झिड़क देता कि दुकान पर पूजा होने के बाद मिलेंगे। दुकान पर पूजा रात को दस बजे के बाद होती है। हम अपनी नींद भगाने का भरसक प्रयास करते हुए पटाखों के थैले पर नजर गडाये बैठे रहते कि कब पूजा समाप्त हो और कब हम पटाखे चलायें। कई बार तो हम सो ही जाते थे और जो जगे रहते तो भी अकेले-अकेले चलाने में मज़ा नहीं आता, बाक़ी बच्चे तो सो चुके होते थे। शाम होते ही मेरे दोस्त एक दुसरे के साथ होड़ में चलाते थे, उसमे जो मज़ा आता है वो अकेले में कहाँ? एक का बजना बंद तो दुसरे का शुरू। लेकिन जब तक बल्लू भैया हमें देता, तब गली में कुत्ते भौंक रहे होते । लेकिन इस बार बल्लू की कोई फ़िक्र नहीं। अबकी बार हम दिल खोल कर पटाखे लेंगे, चलाएंगे और देखते हैं "मोहन एंड रवि द ग्रेट" के आगे कौन टिकता है।

मैं और रवि तो सुबह आठ बजे से ही तैयार होकर बैठे हैं। बारी-बारी से अन्दर लगी घड़ी को देखकर आते हैं। आज पता नहीं क्यों दस बज ही नहीं रहे हैं। अंततः बड़े भैया, मैं और रवि बाज़ार के लिए रवाना हो गए। बाप रे ! बाज़ार में आज बड़ी भीड़ है और पटाखों की दुकान पर तो पैर रखने की भी जगह नहीं है। बड़े भैया मुझे पूछ-पूछ कर पटाखे ले रहे हैं, रवि तो अभी छोटा है, उसे पटाखों के बारे में ज्यादा पता नहीं है। मैं उचक-उचक कर बताता हूँ... बड़े भैया यह अनार ले लो...वो रॉकेट.... और वो फुलझडी। और एक घंटे बाद दो बड़े-बड़े थैले लेकर हम शान से घर की ओर चल दिए

रास्ते भर मैं शाम की कल्पना में मगन था। आज हमारे पास इतने सारे पटाखे देख कर तो गली के बच्चों को पसीना आ जाएगा। बड़े दिनों से हमें ललचा-ललचा कर पटाखे चला रहे थे, आज देखते हैं किसमे कितना है दम। कब घर आ गया पता ही नहीं चला। दोंनों थैले लेकर बड़े भैया रिक्शा से उतरे और रवि को उतारा। मैं तो ख़ुद ही कूद कर उतर गया।

मेरे मन में आगे का चित्र घूम रहा था। अब बड़े भैया अन्दर जायेंगे...भाभी पानी लेकर आएगी..भैया एक थैला मुझे देंगे और एक रवि को और कहेंगे....मोहन! रवि के पटाखे भी तुम ही चलवाना...यह तो छोटा है । बड़े भैया अन्दर गए... भाभी पानी लाई..भैया ने दोनों थैले भाभी को दिए और कहा....इन्हे अन्दर रख दो ...और आँख मूँद कर लेट गए। यह क्या....अब तक तो जैसा मैंने सोचा था वैसे ही हुआ...पर ....क्या बड़े भैया भी बल्लू भैया की तरह.......। मेरा गला सुख रहा था....मैंने थूक निगलते हुए दबी जुबान में पूछा ...."बड़े भैया....पटाखे?"... भैया ने चौंक कर आँखे खोली और खंखारते हुए बोले..."अरे हाँ.... मैं तो भूल ही गया था।" उन्होंने अपनी जेब में हाथ डाला...एक पाँच रुपये का नोट निकला और मुझे पकडाते हुए कहा ...."ऐसा करो मोहन...तुम भी अपने लिए पटाखे ले आओ।" गली में बड़ी जोर से धडाम की आवाज हुई....लगता है किसी ने बड़े वाला एटम बम फोड़ा है।

(इस कहानी के पात्र और घटनाए काल्पनिक है, किसी जीवित या मृत व्यक्ति अथवा घटना के साथ इसका कोईसम्बन्ध नहीं है। किसी के नाम और घटना का मिलना महज संयोग है। )



30-Jun-2009

आत्मविश्वास ही सब कुछ है

कहते है कि इंसान अपना सब कुछ खो कर भी अगर आत्मविश्वास ना खोये तो समझ लो उसने कुछ भी नहीं खोया। कई दिनों पहले मैंने एक कहानी पढ़ी थी और यह इस बात की पुष्टि करती है।

एक दिन एक कुत्ता जंगल में रास्ता खो गया । तभी उसने देखा एक शेर उसकी तरफ़ आ रहा है । कुत्ते की साँस सूख गई । "आज तो
मेरा काम तमाम !" उसने सोचा । फिर उसने सामने कुछ सूखी हड्डियाँ पड़ी देखी । वह आते हुए शेर की तरफ़ पीठ कर के बैठ गया और एक सूखी हड्डी को चूसने लगा और ज़ोर ज़ोर से बोलने लगा ....."वाह ! शेर को खाने का मज़ा ही कुछ और है .....एक और मिल जाए तो पूरी दावत हो जायेगी !" और उसने ज़ोर से डकार मारी । इस बार शेर सकते में आ गया । उसने सोचा "ये कुत्ता तो शेर का शिकार करता है ! जान बचा करा भागो !" और शेर वहां से चंपत हो गया।

पेड़ पर बैठा एक बन्दर यह सब तमाशा देख रहा था । उसने सोचा यह मौका अच्छा है शेर को सारी कहानी बता देता हूँ – शेर से दोस्ती हो जायेगी और उससे ज़िन्दगी भर के लिए जान का खतरा दूर हो जाएगा । वह फटाफट शेर के पीछे भागा । कुत्ते ने बन्दर को जाते हुए देख लिया और समझ गया कि कोई लोचा है । उधर बन्दर ने शेर को सब बता दिया कि कैसे कुत्ते ने उसे बेवकूफ बनाया है । शेर ज़ोर से दहाड़ा... "चल मेरे साथ .... अभी उसकी लीला ख़तम करता हूँ " और बन्दर को अपनी पीठ पर बैठा कर शेर कुत्ते की तरफ़ लपका ।

कुत्ते ने शेर को आते देखा तो एक बार फिर उसकी तरफ़ पीठ करके बैठ गया और ज़ोर ज़ोर से बोलने लगा , "इस बन्दर को भेजे एक घंटा हो गया साला एक शेर फाँस कर नही ला सकता !"

यह सुन कर शेर के तोते उड़ गए और बन्दर उसकी पीठ पर से कब नौ-दो ग्यारह हुआ, पता ही नही चला।

26-Oct-2008

हैप्पी दिवाली

उनकी उजली, अपनी काली
हैप्पी दिवाली

वे ठसाठस, हम खाली
हैप्पी दिवाली

उनको गीत, हमको गाली
हैप्पी दिवाली

उनके सब नाते, हम मवाली
हैप्पी दिवाली

उनके पटाखे, अपनी ताली
हैप्पी दिवाली

उन्होंने फेंकी, हमने सजाली
हैप्पी दिवाली

लक्ष्मी उनको, हमें कपाली
हैप्पी दिवाली

हमरी बिगड़ी, उन्होंने बनाली
हैप्पी दिवाली

उन्होंने मनाई, हमने निकाली
हैप्पी दिवाली

आप सबको दीपावली की ढ़ेर सारी शुभकामनाओं के साथ

25-Oct-2008

बजाओ हिन्दी में ताली

आज अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर उनलोगों को करारा जबाब दिया है जो कल उनके हिन्दी में लिखने से अप्रसन्न थे और यहाँ तक कह दिया कि अगर उन्होंने हिन्दी में लिखना जारी रखा तो वे उनके ब्लॉग पर आना छोड़ देंगे। मुझे आश्चर्य होता है ऐसे लोगों की मानसिकता पर और उनकी सोच परकमाल की बात यह है कि जिस अमिताभ बच्चन कि हिन्दी फिल्मे देख-देख कर कर यह लोग उनके प्रशंसक बने, वही उनसे कह रहे है कि हिन्दी में लिखोगे तो आपके ब्लॉग पर नहीं आयेंगे। "गुलगुले तो खाए पर गुड़ से परहेज"

कोई बात नहीं अमित जी, वो आए तो आए, हम तो हैंहम तो पहले भी आते थे और अब और ज्यादा आयेंगेमैं हिन्दी ब्लॉगजगत के लिखने और पढने वालों से आह्वान करता हूँ कि वह ज्यादा से ज्यादा बिग बी के अड्डे पर जायें, उन्हें प्रोत्साहित करें और उन्हें अहसास दिलाएं कि हम हिन्दी में ताली बजाने वालों की ताली की गूंज भी कुछ कम नहीं है

हिन्दी ब्लॉग संयोजक भी बिग बी के ब्लॉग को अपने चिट्ठे में शामिल करें ताकि अच्छे हिन्दी ब्लागरों की नजर इस पर पड़े और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे पढ़े। यह कहने की जरुरत नहीं है कि भारत में "ब्लॉग" शब्द को अमिताभ बच्चन ने ही आम आदमी से परिचित करवाया है। पिछले साल तक तो बहुत से लोग यह जानते भी नहीं थे कि ब्लॉग क्या होता है? अब उनका हिन्दी में लिखना सोने पे सुहागे के समान है और हमें हिंद के लिए और हिन्दी के लिए इसे बढावा देना चाहिए।

24-Oct-2008

बिग बी ने हिन्दी में लिखा :)

कुछ दिनों पहले मैंने बिग बी के ब्लॉग पर एक पत्र लिखा था, इस निवेदन के साथ कि वे हिन्दी में भी लिखें और बदले में उन्होंने वादा किया कि वे "जरूर लिखेंगे" और आज मुझे जान कर हार्दिक खुशी हो रही है कि अंततः उन्होंने आज हिन्दी में लिखायह बात हिन्दी ब्लॉग्गिंग के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी, ऐसी मेरी उम्मीद हैभले ही देर से ही सही, हिन्दी में लिखना शुरू कर दिया इसके लिए वह धन्यवाद् के पात्र हैमैं तहे दिल से उनका शुक्रिया अदा करता हूँ और आशा करता हूँ वे भविष्य में भी हिन्दी में लिखना जारी रखेंगेउनके हिन्दी में लिखने से हमारे देश के बहुत सारे लोगों को अपनी राष्ट्रभाषा पर अभिमान होगा और लोग हिन्दी के प्रयोग पर हीन-भावना महसूस नहीं करेंगे

अमित जी पुरे भारत वर्ष का गर्व है और उनके इस प्रयास से हम सब का सर गर्व से ऊँचा हुआ हैंमेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें बहुत लम्बी उमर देंआप सभी से निवेदन है कि उनके ब्लॉग पर जाकर उनका हौसला बढाएं ताकि वह ज्यादा से ज्यादा हिन्दी में लिखे और आम आदमी भी उनका लिखा पढ़ और समझ सकें

अमित जी से भी मैं प्रार्थना करता हूँ कि वे हिन्दी में लिखे ब्लॉग भी पढ़ें और उन्हें अपना आशीर्वाद दें, इससे हिन्दी ब्लॉग्गिंग के प्रति लोगों कि जागरूकता बढेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग इसमे शामिल होंगे।